सत्य सनातन योग की स्थापना की प्रेरणा पूज्य गुरूजी श्री रजनीश एम् मिश्रा ' शिवाय' जी को ध्यान की अवस्था में स्वयं परमेश्वर एवं सिद्धगुरूओं से मिली। वर्तमान में विश्व में चल रही अराजकता , अशांति , कुरीतियां, अन्धविश्वास , होने वाली त्रासदियों और मानवता के पतन को देखते हुए श्री शिवाय जी ने ये समस्त विश्व में सत्य सनातन की स्थापना करने का बीड़ा उठाया है।
श्री रजनीश एम् मिश्रा जी, जिन्हें प्रेमपूर्वक “शिवाय” के नाम से जाना जाता है, एक आत्मसाक्षात्कारी योगी और रहस्यवादी संत हैं। उन्होंने उस प्राचीन वैदिक ज्ञान को जनसाधारण तक पहुँचाने का कार्य किया है, जो विदेशी आक्रमणों और सहस्राब्दियों तक चली दासता के दौरान लगभग लुप्त हो गया था।
वर्तमान में वे इस पृथ्वी पर एकमात्र जीवित आध्यात्मिक गुरु हैं जो साधकों को “अद्वैत गायत्री साधना,अद्वैत महामृत्युंजय साधना, अद्वैत महामृत्युंजय शक्ति साधना” में दीक्षित करने की क्षमता रखते हैं।
आध्यात्मिक रूप से उन्मुख माता-पिता के घर जन्मे श्री रजनीश जी बचपन से ही अध्यात्म के प्रति गहरी रुचि और आत्मज्ञान की तृष्णा रखते थे। इसी अंतःप्रेरणा ने उन्हें अनेक स्वघोषित गुरुओं के संपर्क में पहुँचाया, जिन्होंने उन्हें उस गूढ़ और रहस्यमय ज्ञान की दिशा में मार्गदर्शन दिया — जो सामान्य मनुष्य के लिए कल्पना से परे है।
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