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Sanatan Yog की स्थापना, प्रेरणा, और इतिहास।

सत्य सनातन योग की स्थापना की प्रेरणा पूज्य गुरूजी श्री रजनीश एम् मिश्रा ' शिवाय' जी को ध्यान की अवस्था में स्वयं परमेश्वर एवं सिद्धगुरूओं से मिली। वर्तमान में विश्व में चल रही अराजकता , अशांति , कुरीतियां, अन्धविश्वास , होने वाली त्रासदियों और मानवता के पतन को देखते हुए श्री शिवाय जी ने ये समस्त विश्व में सत्य सनातन की स्थापना करने का बीड़ा उठाया है।

श्री रजनीश एम् मिश्रा 'शिवाय' जी के बारे में

श्री रजनीश एम् मिश्रा जी, जिन्हें प्रेमपूर्वक “शिवाय” के नाम से जाना जाता है, एक आत्मसाक्षात्कारी योगी और रहस्यवादी संत हैं। उन्होंने उस प्राचीन वैदिक ज्ञान को जनसाधारण तक पहुँचाने का कार्य किया है, जो विदेशी आक्रमणों और सहस्राब्दियों तक चली दासता के दौरान लगभग लुप्त हो गया था।

वर्तमान में वे इस पृथ्वी पर एकमात्र जीवित आध्यात्मिक गुरु हैं जो साधकों को “अद्वैत गायत्री साधना,अद्वैत महामृत्युंजय साधना, अद्वैत महामृत्युंजय शक्ति साधना” में दीक्षित करने की क्षमता रखते हैं।

आध्यात्मिक रूप से उन्मुख माता-पिता के घर जन्मे श्री रजनीश जी बचपन से ही अध्यात्म के प्रति गहरी रुचि और आत्मज्ञान की तृष्णा रखते थे। इसी अंतःप्रेरणा ने उन्हें अनेक स्वघोषित गुरुओं के संपर्क में पहुँचाया, जिन्होंने उन्हें उस गूढ़ और रहस्यमय ज्ञान की दिशा में मार्गदर्शन दिया — जो सामान्य मनुष्य के लिए कल्पना से परे है।

जानिए और अधिक श्री शिवाय जी के बारे में

सत्य सनातन योग का आधारभूत विश्वास (Core Beliefs)

  • सत्य ही परम धर्म है — संस्था का प्रत्येक कार्य सत्य, पारदर्शिता और ईमानदारी के आधार पर किया जाएगा।
  • सनातन धर्म सार्वभौमिक जीवनशैली है — यह किसी एक सम्प्रदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता का मार्ग है।
  • मानवता ही ईश्वर की पूजा है — प्रत्येक प्राणी में वही दिव्यता विद्यमान है, जिसे हम पूजते हैं।
  • योग ही जीवन का विज्ञान है — योग के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा का संतुलन स्थापित कर जीवन में पूर्णता प्राप्त की जा सकती है।
  • ज्ञान ही मुक्ति का मार्ग है — अंधविश्वास से नहीं, सत्य ज्ञान से व्यक्ति और समाज का उत्थान संभव है।
  • शक्ति और करुणा का संगम ही धर्म है — धर्म केवल शक्ति नहीं, बल्कि करुणा और सह-अस्तित्व की भावना है।
  • प्रत्येक मानव में ईशत्व निहित है — हर व्यक्ति दिव्यता का अंश है; उसे जागृत करना ही सनातन योग का लक्ष्य है।

आधारभूत सिद्धांत (Core Values)

  • राष्ट्र हित — राष्ट्र हित से बड़ा कोई धर्म नहीं है और राष्ट्र हित और धर्म रक्षा के लिए सस्त्र भी उठाना पड़े तो वो भी धर्म ही कहलायेगा।
  • अहिंसा और प्रेम — विचार, वाणी और कर्म से किसी को हानि न पहुँचाना, और प्रेम से ही सबको जोड़ना।
  • सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता — संस्था के सभी कार्यों में सच्चाई, स्पष्टता और उत्तरदायित्व का पालन।
  • निस्वार्थ सेवा सेवा ही सर्वोच्च साधना है; बिना किसी लाभ की भावना से समाज के लिए कार्य करना।
  • समानता और समरसता — समाज में जाति, पंथ, लिंग, भाषा या वर्ग के किसी भी भेदभाव को स्वीकार नहीं करना।
  • आत्मानुशासन और संयम — हर सदस्य अपने जीवन में योग, नियम, और संयम का पालन करे।
  • पर्यावरण संरक्षण — प्रकृति के पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश) की पवित्रता की रक्षा करना।
  • नारी सम्मान — नारी को शक्ति रूपा मानकर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समान सम्मान और अधिकार देना।
  • सद्भाव और सहयोग — संस्था के कार्यों में सहयोग, संवाद और सौहार्द का वातावरण बनाए रखना।

संगठन के मूल सिद्धांत (Guiding Principles)

  • सत्य योग सिद्धांत: प्रत्येक नीति, निर्णय और गतिविधि “सत्य, करुणा और विवेक” के तीन स्तंभों पर आधारित होगी।
  • सनातन एकत्व सिद्धांत: समस्त धर्मों, विचारधाराओं और मानव समाज में एकता और दिव्यता के भाव को प्रोत्साहन देना।
  • कर्म प्रधानता सिद्धांत: परिणाम से अधिक, कर्तव्य और निष्ठा पर बल देना।
  • सशक्तिकरण सिद्धांत: शिक्षा, साधना, और सेवा के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर एवं जागरूक बनाना।
  • सामाजिक नवजागरण सिद्धांत: अंधविश्वास, अन्याय, और असमानता के विरोध में सत्य ज्ञान का प्रसार करना।
  • समरस जीवन सिद्धांत: मनुष्य, प्रकृति और ईश्वर के बीच संतुलन स्थापित करना ही सच्चा योग है।
  • योग-समन्वय सिद्धांत: भक्ति, प्रेम, ज्ञान, कर्म, और राजयोग — पाँचों योगों का एकत्व जीवन में लाना।
  • निरंतर आत्मविकास सिद्धांत: प्रत्येक सदस्य अपने जीवन में सतत आत्मविकास, आत्मज्ञान और आत्मसेवा का संकल्प धारण करे।