“अब समय आ गया है… जागो भारत, जागो मानवता।”
हम सब उस युग में जी रहे हैं जहाँ सत्य, शांति और धर्म के स्वर दबने लगे हैं।
लेकिन हर युग में कुछ आत्माएँ उठती हैं — जो प्रकाश बनती हैं, जो मार्ग बनाती हैं।
यदि आपके हृदय में भी वह पुकार है — कि ‘मैं कुछ बदलना चाहता हूँ’, कि ‘मैं ईश्वर, समाज और अपने आत्मा के लिए कुछ करना चाहता हूँ’, तो सत्य सनातन योग आपका अपना परिवार है।
आइए, इस युग में सत्य, योग और प्रेम का दीपक बनें। अपने भीतर के शिवत्व को जागृत करें और विश्व में सनातन की पुनः स्थापना में सहभागी बनें।
🔸 “एक धर्म, एक राष्ट्र – संपूर्ण विश्व सनातन राष्ट्र”
“सेवा भी साधना है, और साधना ही सच्चा धर्म।”
जब एक हृदय निस्वार्थ होकर किसी और के लिए धड़कता है —
वही क्षण ईश्वर के धरती पर उतरने का क्षण होता है।
सत्य सनातन योग इस भावना का प्रतीक है।
यहाँ सेवा केवल दान या मदद नहीं,
यह स्वयं को ईश्वर की इच्छा के साथ जोड़ने की प्रक्रिया है।
हमारे लिए सेवा का अर्थ है —
हम ऐसे सेवकों की खोज में हैं —
जो अपनी आत्मा में यह पुकार सुनते हैं कि
“मेरा जन्म केवल अपने लिए नहीं, बल्कि संसार के कल्याण के लिए हुआ है।”
यदि आपके भीतर यह भावना है कि –
“मैं अपने राष्ट्र, अपने धर्म और समाज के लिए कुछ कर सकता हूँ…” — तो जान लीजिए,
आप वही आत्मा हैं जिसे सनातन पुकार रहा है।
🔸 “जब एक सेवक जागता है, तो हजारो- लाखों जीवों का कल्याण होता है।”
“आपका एक संकल्प — एक युग का नवजागरण।”
जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में स्वस्थ्य , सफलता, उन्नति , ज्ञान एवं सत्य को अपनाने का निश्चय करता है,
तो वह केवल अपना जीवन नहीं बदलता —
वह एक नए युग का बीज बोता है।
सत्य सनातन योग का सदस्य बनना केवल औपचारिकता नहीं —
यह एक जीवन-संकल्प है।
एक वचन है कि “मैं अपने जीवन को उन्नति की ओर ले जाने का प्रयास करूँगा।”
यहाँ सदस्यता का अर्थ केवल एक पहचान नहीं — यह है चेतना का मिलन। जब आप सदस्य बनते हैं, तो आप अपनी चेतना को धर्म, ज्ञान, और करुणा के प्रकाश से जोड़ते हैं।
और अपने जीवन को, अपने परिवार को, अपने राष्ट्र को ऊँचा उठाऊँगा।”
यहाँ सदस्यता का अर्थ केवल एक पहचान नहीं —
यह है “चेतना का मिलन।”
जब आप सदस्य बनते हैं,
तो आप अपने आप को अनुमति देते है कि आपकी चेतना उस सत्य और ज्ञान से जुड़ना चाहती है,
जो युगों से धर्म, ज्ञान, और करुणा का प्रकाश फैलाती आई है।
आप उस परंपरा से जुड़ते हैं —
जिसमें कर्म, प्रेम, योग और ज्ञान साथ-साथ चलते हैं।
जहाँ साधना केवल ध्यान में नहीं,
बल्कि हर सांस, हर कर्म, हर विचार में होती है।
सदस्य बनना, अपने भीतर यह पुकार सुनना है —
“मैं ईश्वर का अंश हूँ, और अब मैं अपने उद्देश्य को जीना चाहता हूँ।”
जब आप इस मिशन का हिस्सा बनते हैं,
तो आप न केवल अपने लिए कार्य करते है बल्कि आपकी उन्नति से स्वतः ही समाज और राष्ट्र कि उन्नति भी होनी शुरू हो जाती है।
आपकी यह सदस्यता —
आपकी आत्मा के लिए साधना है,
और राष्ट्र के लिए पुनर्जागरण है।
आज यह अवसर आपके सामने है —
बल्कि सनातन की पुनः स्थापना में सक्रिय भागीदार बनने का।
सदस्य बनें — क्योंकि जब एक आत्मा जागती है, तो सौ आत्माएँ प्रकाश पाती हैं।
🔸 “जो स्वयं को साधता है, वही विश्व को साधता है।”
Address: Satya Sanatan Yog
Complete Cure, 3rd Floor, SHOP NO 3, 91 92 G B MARG, ISHWARI DAYAL COMPLEX,
Lucknow, Uttar Pradesh, India - 226018